यहाँ से तुम खड़े हो कर के कहाँ देख रहे हो

यहाँ से तुम खड़े हो कर के कहाँ देख रहे हो
पता है किसने दी नज़रें जो जहाँ देख रहे हो

बज़मे जाना में जो बैठोगे तो खाओगे ज़ख़्म
ये सही है के वहीं देखो जहाँ देख रहे हो

इस तरह खोए हुए हो कहाँ आकाश में तुम
बंद आँखों से सितारों का जहाँ देख रहे हो

तुम बहुत देर से कोशिश में हो पढलो मुझको
क्या नजूमि हो,मेरा दर्द ए नहाँ देख रहे हो

वो नज़र फेर रहा है अजीब तुम हो मगर
तुम यहाँ देख रहे हो के वहाँ देख रहे हो
Munib Muzaffarpuri

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